सिर्फ खाँसी से नही बोलने से भी फैलता है कोरोना

  Research work done by pwn kr, a railway staff          

            
           
            बोलने से भी फैल सकता है कोरोना

आज कोरोना पूरी दुनिया मे अपना पैर तेजी  से पसारता जा रहा है ।दुनिया के ताजा आंकड़े इस वायरस की संक्रमण की गति क्या है इसकी गवाह है। इस वायरस की फैलने की वजह खाँसना या छिकना बताया जा रहा है। और दूसरी तरफ ये भी तर्क दे रहे है कि आधे से अधिक कोरोना के patient वैसे मिल रहे है जिनमे कोई खाँसने या क्षिकने के कोई लक्षण ही नही है। तो   क्या सिर्फ खाँसने या छीकने से यह वायरस की फैलने की गति क्या इतना तेज हो सकती है जितना बड़ी रफ्तार से यह फैलता जा रहा है? 
         इसकी फैलाव की वजह सिर्फ खाँसना या छिकना नही बल्कि बोलना भी है । हाँ यह सुनने में अजीब सा है क्योंकि न हम जानने की प्रयास की है और न ही दुनिया ने बताया है । पर  इस शोधपत्र को अंत तक पढ़ने के बाद आप भी आस्वस्त हो जाएंगे कि बोलना भी एक वजह हो सकती है। 

 इस बात की पुष्टि करने से पहले हम यह जान लेते है कि किसी बाहरी unwanted सूक्ष्मजीव के हमले से हमारा शरीर कैसे काम करता है?
 पहले आपको बता दु की हमारे शरीर मे भी डॉक्टर, अस्पताल, लैब होते है पर ये हमारे जैसे मानव निर्मित नही बल्कि प्राकृतिक निर्मित चूँकि हमारे शरीर पर रोजाना किसी न किसी सूक्ष्मजीवों का हमला होते रहता है और हमारे शरीर के medical staff टीम हमेशा दुश्मनों से मुकाबला करते रहते है और हमे बचाते रहते है और हमे पता भी नही चलता। आपके मन मे एक सवाल जरूर उठ रही होगी कि यदि हमारा शरीर का medical department fail हो जाय या न रहे तो हमे क्या होगा?
यदि ऐसा हुआ तो हम भी जीवित नही रहंगे और हमे दुनिया के कोई भी डॉक्टर  या दवा नही बचा सकता । एक उदाहरण से आप अच्छी ढंग से समझ पाएंगे। अपने HIV वायरस या एड्स बीमारी  के बारे में सुना तो होगा । यह सूक्ष्मजीव हमारे शरीर के medical डिपार्टमेंट (immune system) को नष्ट कर देता है । जिसके कारण हमारी शरीर छोटे से छोटे दुश्मनों का भी  सामना नही कर पाता है और हमारी मौत एक छोटी सी फोड़ा या common minor disease से हो सकती है जबकि इन रोगों की दवा दुनिया मे महजूद है । अब आप सोच सकते है कि nature made health department का कोई भी विकल्प दुनिया मे नही है। 
   चलिए हम अपनी मुद्दे की बात पे आते हैं हम इस बात की चर्चा कर रहे थे कि हमारा शरीर unvisible दुश्मनो से सामना कैसे करता है ?
हमारा शरीर बाहरी दुनिया की तरह ही दो stage में काम करता है।
1. Normal stage  - जब हमारे शरीर मे अनचाहा जीव प्रवेश करता है तो हमारा doctor relax way में काम करता है । वह उस जीव को मारने के लिए पहले से महजूद दवाइयों का इस्तेमाल करता है जब इस दवाइयों का असर नही होता है और दूसरी तरफ  वह जीव हमारे शरीर के biomechanism को unbalance करना शुरू कर देता है तो हमारे शरीर के डॉक्टर अलर्ट हो जाते हैं। उसे अभास हो जाता है कि यह जीव वह नही जैसा हम सोच रहे है। यह एक नया है। और इससे झूझने के लिए stage 2 operation चालू करता है।

2. Emergency stage - चूँकि नए दुश्मन होने के वजह से हमारे शरीर के पास उसे मारने के लिए perfect antibody नही होते है। इसलिए इस स्टेज में हमारे शरीर को एक समय मे अनेक काम करने पड़ते हैं । महजुदा दवाइयों से ही इलाज कर रहे होते हैं और दूसरी तरफ    इसका antibody ढूढ़ने के प्रयास भी कर रहे होते है। चूँकि हमारा दुश्मन भी अपने संख्या में बढ़ोतरी कर हमारे organ को प्रभावित करता है इसलिए इसकी संख्या को कम करने के लिए हमारे शरीर से बाहर निकाल रहा होता है। जैसे यदि इन्फेक्शन पेट मे हो तो इसे मल के माध्यम से बाहर करता है। यदि इंफेक्शन lungs में हो तो खांस या छिक के माध्यम से बाहर करता है। सिर्फ शरीर से ही बाहर नही करता बल्कि बाहर से अन्दर आ रहे जीवों को भी रोकता है इसलिए अपने देखा होगा कि जब हमें lungs viral इन्फेक्शन होता है तो हमारे nose और throat में mucus बनना चालू हो जाता है । जानते है क्यों? ताकि वे बाहर से आ रहे अज्ञात दुश्मनों को रोक सके ।
       चलिए अब हम बात करते है कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद हमारा शरीर कैसे response करता है और एक संक्रमित व्यक्ति दूसरे को कब और कैसे संक्रमित कर सकता है। जब कोरोना किसी पर attack करता है तो उसका शरीर pre-attacker मानकर normal (stage1) रूप में treat करता है ।पर जब पहले से महजूद संसाधनों से कोरोना पर कंट्रोल नही हो पाता है तब emergency treatment ( stage 2) चालू करता है। और इसी दौरान खाँसी या बुखार के लक्षण दिखने लगते है। stage 1 से stage 2 में मूव करने में कितना दिन लगता है यह मरीज के शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता   ( immune system) के मजबूती पर निर्भर करता है।बच्चे और बूढ़े में लक्षण जल्दी दिख सकते हैं क्योंकि बूढ़े व्यक्तियों के immune system weak हो जाते है जबकि बच्चे के immune system develop नही हो पाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि बहुत से दुनिया मे ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें कोरोना हुआ होगा और बिना medical treatment के ही ठीक हो गए होंगे और उन्हें पता तक भी नही चला होगा कि उन्हें कोरोना जैसे वायरस से वे संक्रमित हो गए थे।

        अब मैं आपसे कुछ सवाल पूछता हूँ कि जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति जब वह stage 1 में रहता है और उस दौरान उसे खाँसी या छिक जैसी लक्षण भी दिखाई नही देता है तो क्या वह इस दौरान कोरोना फैला रहा होता है और यदि हाँ तो कैसे? दुनिया के अनुसार कोरोना का फैलाव खाँसने या छीकने से होता है  बोलने से नही तो आखिर ऐसा क्यों? कुछ तो कारण इसके पीछे होगा । चलिए आज आपको हम समझाते है।जब हम emergency stage में होते है तो हमारा शरीर सिर्फ antibody develop करने में सिर्फ नही जुटा रहता है बल्कि वे इस बात की ध्यान रखते है कि आखिर इस नए दुश्मन से कौन से organ प्रभावित हुए है और इसे antibody develop होने तक temporarly इसे कैसे प्रभाव से दूर रखा जाए।
       जैसे कोरोना वायरस हमारे lungs को अधिक प्रभावित करते हैं और इस दौरान हमारे immune सिस्टम के पास दो ही ऑप्शन होते हैं । मौजूदा दवाइयों से इलाज करें या शरीर से इसे बाहर निकाले। इसलिए इसे बाहर करने के लिए खाँसी जैसे लक्षण आते है। पर सवाल यह उठता है कि खाँसी के दौरान ही क्यों ? सामान्य रूप से जब हम साँस लेते है या बोलते है तब क्यों नहीं ? इसे समझने के लिए हमे यह जानना होगा कि हमारा lungs काम कैसे करता है? 
     हमारा शरीर में फेफड़े का काम गैसों को filter कर हमारे शरीर को मुहैया कराना  है जो हमारे शरीर को भोजन बनाने के लिए जरुरी है और उसे बाहर करना है जो cell में   भोजन बनाने के दौरान बनता है। जैसे O2 और CO2 । इन गैसों का अदान-प्रदान सामान्य श्वसन क्रिया के दौरान होते रहती है पर कोरोना के कण सामान्य श्वसन के दौरान हमारे शरीर से बाहर नही हो सकता । इसका कारण है कोरोना की size को O2 & CO2 से बड़ा होना । O2 का size 0.3 nm होता है , CO2 का size 0.25 nm होता है जबकि कोरोना वायरस का size 60 nm होता है। अर्थात काफी बड़ी होती है इसलिये इसे हमारे शरीर से बाहर निकालने के लिए  हमारे lungs के वायुकोष के छिद्र को सामान्य से बड़ा करना होता है और ऐसा करने के लिए हमारे lungs के नीचे महजूद diaphragm muscle tissue lungs को जोर से धक्का देकर press करता है जिसके कारण वायुकोष में present हवा तेजी से बहुत कम समय के अंतराल में बाहर आते हैं । इस दौरान वायुकोष के hole inflate हो जाते हैं और फेफड़े में महजूद बड़े कोरोना कण बाहर आ जाते है। इसलिए अपने खाँसते या क्षिकते समय कभी गौर करा होगा की इस दौरान वायु अधिक मात्रा में बाहर आता है।   इसे अच्छी से समझने के लिए आप dairy से एक दूध का पैकेट ले और और उसमें एक सुई लेकर छिद्र कर दे । और आप धीरे से पैकेट को press करें आप देखेंगे कि एक पतली से दूध की फवारा निकलेगी । अब आप इसे जोड़ से press करे ।इस बार दूध की फवारा के धार मोटी हो जाएगी औऱ तेजी से बाहर आएगा । ऐसा इसलिए हुआ चुकी पैकेट प्लास्टिक का बना होता है जो nature में flexible होता है । आपके द्वारा लगाए गए अधिक pressure के वजह से इसका hole inflate हो गया । हमारा lungs तो soft muscle tissue का बना होता है  तो इसके तो flexibility और अधिक होती है। 
 अब हम इस बात को देखेंगे कि क्या कोरोना  बोलने से फैल सकता है? यह 100% दावे से नहीं कह सकते पर इंकार भी नही क्या जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस तीव्रता से बोलते है और हमारा बाहरी वातावरणीय वायु दवाब क्या है। क्योंकि जब हम विज्ञान के आधार पर खाँसी, छिक और बोलने में तुलना करें तो हम एक सा ही काम कर रहे होते है। हम तीनों cases में lungs से हवा बाहर निकाल  रहे होते है। अंतर बस इतना कि खाँसते या छीकते समय हमारा air pressure अधिक होता है जबकि बोलते वक्त कम। 
पर हम जब चिल्लाते या चीखते है या  जोर से पुकार लगाते है तो इस केस में तेज ध्वनि उत्पन करने के लिए  हम high pressure के साथ हवा lungs से बाहर निकालते है जिसके कारण वायुकोष के inflate होने के chances बढ़ जाते हैं। और संभव है कि उस दौरान कोरोना के कण बाहर आ सकते है। इसे आप एक trial  test कर के देख सकते है । आप अपने हाथ को पेट के पास रखे और feel करे कि आप कोरोना के patient है और आप खाँसने की acting करे आपको महसूस होगा कि आपका lungs तेजी से सिकुड़ा। अब आप एक शब्द  चुप थोड़ा जोर से बोलिये या जोर से हँसिये । इस बार भी आपका lungs पहले के जैसा ही सिकुड़ता हुआ feel होगा पर थोड़ा कम । 
      दूसरी तरफ संभव को और अधिक संभव बनाने में मदद करता है बढ़ती तापमान। चूँकि भारत  गर्मी की ऋतु की ओर बढ़ रहा है और वातावरण का तपमान भी तेजी से बढ़ रहा है जिसके कारण बाहरी वायुदाव भी घट रहा है । इस वजह से हमारा शरीर के रक्त दबाव और वायु दबाव के बीच अंतर भी बढ़ रहा है। जो कि कम तीव्रता के आवाज उत्पन मात्र से ही वायुकोष के inflation के chances बढ़ा देता है।
इसे कुछ दैनिक जीवन मे घटित होने वाली उदाहरण से समझिए । गर्मियों के समय मे  जो बच्चे धूप में खेल रहे होते है उनका नाक से कभी कभार blood आ जाता है । मालूम है क्यों?  क्योंकि जब वे खेल रहे होते है तो उनका रक्तदाब बढ़ जाता है और बाहरी वायुदाब तपमान बढ़ने की वजह से कम हो जाता है जिसके कारण दबाव के अंतर बढ़ जाता है और ब्लड वायुकोष से बाहर आ जाते है। चलिए दूसरा उदाहरण से समझते है यदि किसी मानव को space में ले जाकर छोड़ दिया जाय तो मालूम है उसके साथ क्या होगा उसके lungs के वायुकोष फट जाएंगे और मुँह नाक से blood बहना चालू हो जाएगा ।ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाहरी वायुदाब  शून्य होने के कारण रक्तदाब और इसके बीच के अंतर काफी अधिक हो जाता है। आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा जब blood cells के size जानेंगे ।इसका साइज 7000 nm होता है। यानी यदि हम कोरोना की तुलना एक नवजात बच्चे से करे तो आप blood cells को एक हाथी के आकार का मान सकते है।
और आप।खुद अंदाजा लगा सकते है कि जब फेफड़े से blood cells बाहर आ सकता है तो कोरोना क्यों नही?
     
       लोगों को यह भी लगता है कि जब कोई कोरोना के मरीज ख़ासेगा तभी सिर्फ कोरोना के कण बाहर आयेंगे जो कि एक गलत सोच है । जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति खाँसता है तो उस दौरान lungs से निकले सारे कोरोना कण एक साथ नही वातावरण में बाहर आ जाते हैं उसमें से कुछ कण हमारे नमीनुमा आंतरिक मुँह के त्वचा,  या अन्य गीली जगह जैसे throat ,wind pipe में चिपक जाते हैं और जब वो सामान्य रूप से बोलते है तो वो वाष्प कण के साथ बाहर आते हैं । इसलिए अपने कभी गौर करा होगा कि जब हम अधिक लगातर बोल रहे होते है तो हमे पानी पीने की जरूरत होती है क्योंकि हमारी मुँह के अंदर के गीली त्वचा पानी के कण को वाष्पित हो जाने के कारण सुख जाते हैं। कोरोना से संक्रमित लोगों को खुले सार्वजनिक जगहों पर थूकना भी नही चाहिये क्योंकि उसमें भी कोरोना के कण चिपके  हो सकते हैं।
अब हम उस सवाल के जवाब तलासने की कोशिश करते हैं जो मैंने आपसे पूछे थे कि क्या कोरोना के कण first stage संक्रमण के दौरान भी बाहर आते हैं क्योंकि इस दौरान तो हमे खाँसी या छिक जैसी कोई लक्षण भी दिखाई नही देता। इसका जवाब हम दुनिया मे आ रही संक्रमण के आँकड़े से देखते है । दुनिया मे  बहुत से ऐसे कोरोना संक्रमण के मामले गुच्छे में आ रहे है जिसमे कोई लक्षण तो नही दिखते पर सारे गुच्छे के लोग कोरोना संक्रमित होते है । आखिर जब कोई खाँसने या छीकने के कोई लक्षण ही नही है तो कोरोना फैला कैसे । क्या इसकी वजह बोलना तो नही???
  दुनिया मे कोरोना मरीजों  को देख रहे डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना संक्रमित लोगों में गीली खाँसी के लक्षण नही बल्कि सुखी खाँसी के लक्षण देखने को मिल रहा है। यह हमारे सन्देह को और बढ़ा  देता है । पहले इस बात को समझते है कि आख़िर किन परिस्थितियों में किसी को गीली या सुखी खाँसी आ सकते है और सुखी खाँसी गीली खांस से कितना खतरनाक है । खाँसी गीली या सुखी आएगी यह आंतरिक air pressure पर निर्भर करता है जिस समय आपको गीली खांस आएगा उस समय अधिक मात्रा में एक जोर धक्का के साथ हवा बाहर निकालते है जिसके कारण जब हवा फेफड़े से होकर brochi,  trachea larynx, से होते हुए बाहर आती है तो windpipe( bronchi, larynx) के internal सतह के चारो ओर चिपचिपी सी liquid पदार्थ mucus जमी होती है (जो unwanted कणों को trap कर फेफड़ों में जाने से बचाती है ) उसे भी अपने साथ कर हमारे शरीर से बाहर करता है और breathing रास्ते को साफ करता है इसलिए यदि आपको कभी गीली खाँसी आयी होगी तो आपने गौर करा होगा कि mucus का एक थक्का या चिपचिपा droplets आपके throat से बाहर आया होगा जिस हम आम बोलचाल की भाषा मे खरास कहते  है । जबकि सुखी हुए खाँसी में ऐसा कुछ नही होता । हवा कम मात्रा में low pressure के साथ बाहर आता है। अर्थात कोरोना lungs infection में सुखी खाँसी आने का मतलब हमारे वायुकोष को कोरोना के कण को बाहर करने के लिए अधिक inflate होने की जरूरत नही पड़ती है। 
      कुछ ऐसे भी कोरोना के cases देखने को मिल सकते हैं जिसे कहा जा सकता है कि कोरोना आपके घर के दरवाजे तक गया कुछ समय के लिए ठहरा और बिना आपके घर मे इंट्री किये, उत्पात मचाये वापस चला गया हो मतलब मेरे कहने का अर्थ यह है कि हमारे शरीर उन्ही चीजों को अपने अंदर आने देता है जो हमारे शरीर के biomechanism को maintain करने के लिए जरूरी होता है बाकी को जो अनावश्यक है उसे रोकने की भरशक प्रयास करता है और ऐसा करने के लिए हमारे नाक और मुँह के throat में चिपचिपी viscous liquid पदार्थ महजूद रहता है जो unwanted कण को पकड़ के रखता है और जब saturated हो जाता है तो शरीर उसे खांस या छिक के माध्यम से बाहर करता है । उदाहरण के लिए आपने कभी ऐसा जगह काम किया हो जहाँ धूल के कण उड़ता रहता हो जैसे cement कारखाने या किसान के रूप में खेतों में आदि तो आपने देखा होगा कि आपको जोर से छिक या खाँसी कभी कभी आती होगी। जबकि आपको न कोई सर्दी जुकाम है ना कोई रोग ।
       ठीक इसी प्रकार जैसे कोरोना हमारे नाक से  या मुख से प्रवेश करता है तो वह mucus से चिपक जाता है । हो सकता है यह कई दिनों तक यहाँ ही चिपका रहे या जब आप खाना खाएं, या पानी पिएं या श्वास अंदर खिंचे तो यह आपके शरीर मे प्रवेश कर गया हो । ऐसा भी हो सकता है कि बोलने वक्त , या खाँस छिक के माध्यम से आपके शरीर से बाहर आ गया हो। और आप शिकार होते होते बच गए हो। 
         इसे जाँच के माध्यम से सत्यापित भी किया जा सकता है । हम कोरोना infected होने या न होने की test हम दो तरह से करते हैं।
1. Nose या मुख से mucus collect कर
2. Blood test कर
 अब आप ऐसे 50 मरीज को लीजिये जो देखने मे बिल्कुल स्वस्थ हो पर इसका mucus टेस्ट किया गया तो वह कोरोना से infected निकला हो । मतलब वह patient stage 1 का हो न कि stage 2 ।
    अब इन सभी लोगों का blood test कीजिये इस case में आपको कुछ चौकाने वाले आँकड़े मिल सकते है।  हो सकता है कि आपको इस टेस्ट में 10 -20 लोगों का test negative आए। जो कि mucus test के जाँच में positive थ।

वैसे राज्यों   की घनी आबादी वाले शहर जहां वातावरण का तापमान अधिक है  और तेजी से बढ़ रहा है वहां कोरोना physically कमजोर हो सकता है । तथा लोगों को हानि पहुचाने कि दर में कमी देखी जा सकती है क्योंकि बाहर वायु में  अधिक moisture ( पानी के कण) न रहने के कारण per water molecule में कोरोना को चिपके रहने की संख्या बहुत कम रहेगी। और लोग कम infected होंगे।
 पर बढ़ती तापमान दूसरी समस्या यह उत्पन कर देगी की वायुदाब को काफी कम कर देगी जिसके वजह से बोलने की वजह से कोरोना को फैलने की chances अधिक हो जायँगे। 
   यह परिणाम हमे ऐसे राज्यों  के high density वाले शहर में तेजी से बढ़ती नजर आएगी जहाँ तापमान तेजी से बढ़ रहा है।  लोगों की चहल - पहल अधिक हो और वहाँ के लोग झुंड में इकट्ठा होकर बात करने में मशहुल हो । जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्रा, तमिलनाडु,केरला, गुजरात , दिल्ली आदि। ज्यादा दक्षिण भारत के राज्ये होंगे क्योंकि यहां के तापमान अन्य राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है।

बोलने की वजह से कोरोना फैल सकता है इसका live उदाहरण आपको ऐसे group के लोगों में देखने को मिल सकता है जो अधिक  भिन्न भिन्न स्थानों के लोगों से मिलते है और उनकी बीच की बातचीत नोक झोंक, चीख, चिल्लाहट के साथ होते रहती हो जैसे अभी lockdown के समय मे  सड़क पर पहरेदारी कर रहे पुलिस, hospital के staff ।

       

         कोरोना संक्रमण में तापमान की भूमिका?

दुनिया इस बात को मानकर चल रही है कि किसी भूक्षेत्र के तापमान बढ़ने से कोरोना के मरने के chances बढ़ जाती है और इस तरह से कोरोना के फैलाव पर break लग जायेगा। यह भी देखा गया है कि जिन देशों के वायुमंडलीय तापमान कम है वहाँ फैलाव ज्यादा हुआ है जैसे यूरोपियन राष्ट्र ठंडे मौसम से गुजर रहे है  तो वहाँ कोरोना की फैलाव तेजी से हुऐ है।जबकि हमारा देश india गर्मी की ओर बढ़ रहा है इसलिए कोरोना का फैलाव उतना नही हुआ है जितना ठंडे प्रान्तों वाले देशों में हुआ है।महजुदा आँकड़े से भी इसकी पुष्टि होती है।
         पर संदेह यहाँ पैदा होता है कि हमारा देश india का औसतन तापमान 30!? degree celcius या इससे अधिक है और मानव के शरीर के तापमान 37 डिग्री यानी अंतर 7 डिग्री का । अर्थात यदि तपमान बढ़ने से कोरोना मर रहा है तो हमारे शरीर के अंदर कोरोना को मरणा चाहिए था। तपमान को एक एंटीडोट का रोल अदा करके और हमारे immune system के साथ मिलकर एक मजबूती से कोरोना को मार भगाना चाहिए था।

 बढ़ती तपमान कोरोना को मारती है यह बात तब और अधिक संदेहात्मक हो जाती है जब हम ठंडे प्रान्तों वाले देश के आँकड़े पर नजर डालेंगे। वैसे यूरोपियन देश जो कोरोना के त्रासदी झेल रहे है उसका वायुमण्डलीय तपमान औसतन 15 डिग्री celcius या उससे ऊपर है मानव का तपमान 37 डिग्री यानी अंतर 20 डिग्री से भी ज्यादा तो भारत के उपेक्षा यहाँ तो कोरोना के मरने के chances और अधिक बढ़ जाते हैं। चूँकि। जैसे ही कोरोना बाहरी ठंडी वातावरण से मानव के शरीर के अंदर प्रवेश करेगा वैसे इसे काफी अधिक बढ़ा हुआ temperature वाली वातावरण मिलेगा जिसके कारण उसका मरने के chances और बढ़ जाएंगे । यानी यदि तपमान से कोरोना मरता तो ठंडे प्रान्तों में कोरोना के मरीज कम होने चाहिए थे । पर ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना के cases अधिक है गर्म प्राँतों के उपेक्षा ।

NOTE -----  हाँ तापमान से कोरोना को हानि पहुँच सकती है पर इसके लिए अधिक तापमान चाहिए न कि 30 - 40 डिग्री celcius क्योंकि वायरस जैसे सूक्ष्मजीव बदलती तापमान में अपने को जल्दी अनुकूल बना लेते है। इसलिए तो बड़े जीवों की प्रजाति के उपेक्षा छोटे जीवों की  प्रजाति की संख्या पृथ्वी पर अधिक है।


    यदि मौजूदा तापमान उसे मार तो नही रहा पर कहि फैलाव को बढ़ाने में मदद तो नहीं कर रहा है? जी हाँ कोरोना के फैलाव में temperature एक फैक्टर है।        
          मौजूदा आँकड़े गवाह है कि ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना तेजी से फैल रहा है जबकि गर्म मौसम वाले देशों में धीमा से कोरोना अपना पैर पसार रहा है।
Cold land--- जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति खाँसता या बोलता है तो उसके शरीर से गर्म हवा बाहर आते है इसके  साथ water vapour भी बाहर आते है। चूँकि कोरोना से संक्रमित है और हमारे अंदर कोरोना के कण है तो वे कोरोना कण water vapour के spherical सतह से चिपककर बाहर आ जाते हैं। उस वाष्प में हजारों कोरोना कण चिपके हो सकते हैं। ठंडे वातावरण होने के कारण औसतन तापमान 10 या 15डिग्री के आसपास होता है और हमारा शरीर का temperature 37 डिग्री यानी तपमान का अंतर काफी अधिक हो जाता है। जिसके कारण हमारे शरीर के बाहर आ रहा water vapour condense होकर एक दूसरे से जुड़ जाते है  और बड़े हो जाते है।अब आप सोच सकते है कि जो water vapour के कण हमे दिखाई भी नही दे रहा था उसमें हजारों कण हो सकते है तो condense होने के बाद बने बड़े water molecule में तो लाखों कोरोना के कण हो सकते है। वे कण ठंडे वातावरण के कारण ऊपर नही उठ पाते है और धीरे धीरे जमीन पर गिर जाते है या यदि इस दौरान हम किसी व्यक्ति से बात कर रहे होते है तो हो सकता है ये कण उसके हाथों पर चिपक जाए या उसके श्वास नली या मुख से उसके अंदर प्रवेश कर गया हो।
NOTE------ ऐसी भौतिकी क्रिया हमे भारत मे ठंडे के मौसम में देखनो की मिलती है ।देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो मुँह या नाक से सिगरेट की धुआँ निकल रहा हो।
Hot land----   अभी हमारा भारत देश गर्मी की ओर बढ़ रहा है  और यहाँ के औसतन तापमान 30 डिग्री से अधिक ही है। जब हम बोलते हैं तो हमारे शरीर से भी गर्म हवा और water vapour के कण बाहर आते हैं पर हमारा वातावरण गर्म होने के कारण condense नही हो पाता है और वाष्प के कण बड़े नही हो पाते है। वे वाष्प कण बाहर के तपमान gain करने के बाद और छोटे छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं और ऊपर उठ जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान  हम किसी व्यक्ति से बात कर रहे होते है तो उसे कोरोना से संक्रमित होने के chances ठंडे प्राँतों के लोगो के उपेक्षा कम हो जाती है और होते है तो चूँकि कोरोना के कण उनके अंदर ठंडे प्राँतों के उपेक्षा काफी कम गयी हैं इसलिए recover होने के chances ठंडे प्राँतों वाले संक्रमित व्यक्ति से अधिक होते हैं।
मौजूदा आँकड़े भी इस research को प्रमाणित करता है ।


           
            कितना खतरनाक है कोरोना ?

   दुनिया ने कोरोना को सबसे खतरनाक बीमारी की संज्ञा  दी है इसे मौत का सौदागर कहा जा रहा है । पर सच मे कोरोना  खतरनाक इसलिये नही है कि वह लोगों को मौत दे रहा है पर इसलिये वह खतरनाक है कि काफी तेजी से दुनिया मे फैल रहा है। यदि कोरोना मौत के सौदागर होता तो दुनिया की मौत दर  6-7 नही होता । यदि हम ठंडे भूक्षेत्र वाले developed यूरोपियन देशों और अमेरिका को निकाल दे (( चूँकि वहां के लोगों के जीवन शैली पोल्ट्री मुर्गी की तरह होते हैं )) तो यह मौत दर 3 के आसपास चली जायेगी । यदि  कोरोना की तुलना हम ebola वायरस की मौत दर से करते है तो यह 20 से 25 गुना कम है। तो कैसे हम कोरोना को सबसे खतरनाक वायरस कह सकते है। हाँ सबसे अधिक खतरनाक इस वजह से है कि इसके फैलने की दर record में आये आज तक कि सभी वायरस के तुलना में सबसे अधिक है।

     चलिए अब हम बात अपनीं भारत   के करते हैं हमारा देश की मृत्यु दर 3 - 3.5 के range में fluctuate करते रहता है ।  यदि हम realistic आँकड़े ले तो यह मृत्यु दर लगभग घटकर 1 - 2 हो जाएगा क्योंकि बहुत से  ऐसे कोरोना संक्रमित लोग होंगे जिनका जांच भी नही हुआ होगा । suppose यदि संभव हो और हम एक साथ पूरे भारत के लोगों को test करे तो हो सकता है कि जो कोरोना के  positive cases के confirm data अभी तक आये है । इससे 5 -10 गुना cases अचानक बढ़ जाए और आश्चर्य की बात यह देखने को मिलेगी की 90 % ऐसे संक्रमित लोग होंगे जिनमे कोरोना के कोई भी लक्षण नही है और न ही ऐसे लोगों को ठीक होने के लिए दवाईयों की जरूरत है। वे सब अपने आप ठीक हो जाएंगे। पर खतरे की बात यह होगी कि ऐसे लोगों से कोरोना यदि कमजोर immune पावर वाले लोगों के अंदर चला गया तो उन्हें critical होने के chances काफी बढ़  जाता है ।
   
         हमारे देश के वे राज्य जो rapid test without wait and watch के नीति अपना रहा हो वहाँ  maximum वैसे cases आ रहे होंगे जो कोरोना positive तो है पर इसमें कोई भी कोरोना के लक्षण नही है।
  और कुछ ऐसे राज्य  जो wait watch and test के नियम पर काम कर रहा हो वहां कोरोना के मरीज के data कम होंगे। इसका कतई ये मतलब नही है कि वहाँ सिर्फ उतने ही मरीज होंगे जितना टेस्ट करने के बाद positive  निकले है। 

 कोरोना मरीजों से जुड़ी मौजूदा  data को analysis करें तो कोरोना वायरस हमारे शरीर के सारे system को प्रभावित नही कर रहा है । खासकर वह हमारे  system के ऐसे अंगों को प्रभावित कर रहा है जो blood को filter करने के काम आते है जैसे lungs, kidney, liver । इन सब में हमारा lungs सबसे अधिक प्रभावित हो रहा है । 95% cases lungs से जुड़ी ही आ रहा है । यदि हम कोरोना की तुलना अफ्रीका महादेश में आये इबोला  वायरस से करें तो ebola इसकी तुलना में काफी अधिक खतरनाक था । इबोला तो हमारे शरीर के अधिकांश सिस्टम को प्रभावित किया था जैसे digestive system, circulatery system, respiratory system, muscular system आदि। इसलिए ebola के मरीज को मांसपेशियों में दर्द होना , उल्टी-दस्त,सिरदर्द, बुखार, रक्तस्त्राव, आँखों का लाल होना, गले में परेशानी आदि लक्षण दिखाई देते थे। पर कोरोना के case में वही अंग infected हो रहा है जो blood को फ़िल्टर कर रहा है।   सच कहे तो कोरोना हमारे blood cells पर हमला कर रहा है पर इसे मार नही रहा यदि इसके हमले से हमारे blood cells मरते तो मरीज़ो में heart से जुड़ी समस्या के case आने चाहिए था । या उसे कमजोरी, चक्कर आना, blood pressure से जुड़ी समस्या आदि होना चाहिए था । पर दुनिया के डॉक्टर maximum case में सिर्फ pneumonia( lungs से जुड़ी समस्या) के होने की बात कर रहे है। 
    जब मैं google से कोरोना  how cause lungs problem की जानकारियां collect कर रहा था तो मुझे कुछ ऐसी आँकड़े मिले की कोरोना attack के कारण lungs में mucus बनने लगता है जिसके कारण वायुकोष jam हो जाता है या हमारे throat के पास mucus बनते है जो श्वासनली से होकर हमारे फेफड़े में चला जाता है और फेफड़े को जाम कर देता है और श्वास के अभाव में death हो जाता है।  
       पर मैं इस research से सहमत नही हूँ। जब कोरोना की संख्या हमारे वायुकोष में बढ़ने लगती है तो हमारे lungs को सामान्य रूप से काम करने में दिक्कत आने लगती है हमारे शरीर को लगता है कि इससे वायुकोष jam हो सकता है चूँकि हमारे फेफड़े से वही कण बाहर या अंदर आ सकते है जिसका size O2(0.3nm) & CO2(0.25 nm) के समान हो । प्रकृति ने हमारा वायुकोष के छिद्र को इन गैसों की जरूरतों के अनुसार design किया है। पर कोरोना के size लगभग 60 nm के होते है जो कि बड़े है । वायुकोष को जाम होने से बचाने के लिए हमारा शरीर इसे बाहर निकालना चाहता है चूँकि यह छिद्र के सामान्य अवस्था में नही निकल सकता इसलिये  हमारा शरीर इसे high air pressure ( खाँसी ) की मदद से वायुकोष की छिद्र को बढ़ाता है और बाहर करता है। यह प्रक्रिया बार बार होने के कारण soft muscle tissue से बने वायुकोष में घर्षण होने लगती है जिसके कारण वहाँ सूजन ( फूल जाना) हो जाता है और छिद्र जाम हो जाता है
इसलिए ऐसी स्थिति में हम जब साँस लेते है तो सीने में दर्द होने लगता है और श्वास को जोर से अंदर खीचना पड़ता है मानो हाफ़ रहे है। इस सूजन पर काबू ना पाया जाय तो मरीज की जान भी जा सकती है।

   कोई जीव किसी पर्यावरण में कितना दिनों तक रहता है यह इस बात पर  भी निर्भर करता है है कि वह उस पर्यावरण में कैसा feel कर रहा है । उसके लिए ये जगह कितनी अनुकूल है । यदि कोरोना हमारे शरीर मे रहने आया है तो क्या उसे वैसा environment मिला है कि वह वहाँ आराम से स्थायी रूप से रह सकता है । यदि कोरोना से मानव की मौत हो रहा है तो शरीर के अंदर रह रहे कोरोना की भी मौत हो रही है । यह डर सिर्फ मानव में ही नही है बल्कि कोरोना समुदाय में भी है और  वह वहाँ नही रहना चाहेगा जहाँ उसे ecofriendly environment न मिले । धीरे धीरे वह कमजोर हो जाएगा। और हमारा शरीर dominate कर खत्म कर देगा। पर ऐसा 5-10 दिनों में नही होगा। हो सकता है। ऐसा होने के लिए 4 - 6 महीने लग जाय या इससे अधिक समय भी। यह इस बात पर निर्भर करता है कि यह सूक्ष्मजीव कितना घातक और उसे भी कितनी परेशानी झेलना पड़ रहा है।


               भारत मे कम होंगे मौत के आँकड़े

       यदि भारत के स्वास्थ्य system सही से work करे और कोरोना संक्रमित लोगों को स्टेज 1 में ही detect कर लिया जाय तो हमारे देश मे मौत के आँकड़े ठंडे प्रदेशों के उपेक्षा कम हो सकती है। दुनिया के महानतम वैज्ञानिक charles darwin बताते है कि वैसे प्राणी जो वातावरण में हो रहे बदलाव और किसी बाहरी आक्रमण को झेलते रहते है उनका  survive करने के chances बढ़ जाते हैं। अर्थात आपका शरीर का प्रतिरोधक क्षमता कितना मजबूत हुआ है और मौजूदा परिवेश में रहने के लिए आप कितना fit कर चुके है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने आपदाओं के सामना किये हैं।
   हमारा भारत देश अनेक ऋतुओं का देश है जैसे सर्दी, गर्मी, बरसात,बसन्त ।  हमारे देश मे एक सा समान मौसम नही रहता है । यहाँ गर्मियों के दिनों में अधिक गर्मी तो जाड़ो के दिनों में अधिक ठंड पड़ती है । एक विकासशील देश होने के कारण न ही हमारा स्वास्थ system उतना  develop है ना ही service सेक्टर । हमारा तीन चौथाई आबादी प्राकृतिक छत के नीचे काम करके अपनी रोजी रोटी कमाते है ।चाहे मौसम शरीर को जला देने वाली हो या ठंड हड्डिया गला देने वाली ।बरसात हो या तूफान । हम लोग  लगे रहते है । थोड़ी बहुत तबियत बिगड़ी तो अपने से ही ठीक होने का इंतजार करते है या देशी इलाज अपनाते है। हम भारतीय को अपने को ecosystem में बनाये रखने के लिए अधिक प्रकृति आपदाओं से संघर्ष करना पड़ता है । हमारा शरीर के immune system संघर्ष करते करते मजबूत हो जाता है और हमेशा दुश्मनों के सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
आपने कभी अख़बारों  में पढ़ा है कि जंगल मे रह रहे शेर ने शेरनी को , सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने अपने को किसी अस्पताल में  भर्ती कराया हो । क्या वे हमारी तरह हवा नही लेते । उन्हें इंफेक्शन नही हो सकता । क्योंकि वे हम मानव की तरह AC के कमरे में नही रहते न ही एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए कोई कार का इस्तेमाल करते हैं । वे सब खुले वातावरण में रहते है , गिरे फेक्के भोजन खाते है। फ्राई हुए मांस के स्थान पर कच्चे माँस  खाते हैं । इसलिए उसे बीमार पड़ने के chances हम मानव जाति से अधिक रहता है पर वे प्राकृतिक आपदाओं से संघर्ष करते करते अपने immune system को इतना develop कर लेते है कि मानव जात के लिए घातक लग रहे संक्रमण उनके लिए आम हो जाते हैं।
 आप अभी अपने देश भारत का example ले लीजिए जहां हम  मानव जात अपने अपने घरों में दुबककर बैठे हैं वहां दूसरी तरफ आवारा कुत्ते सड़कों पर मस्ती से घूम रहे है क्या उनके मुख या श्वास के जरिये कोरोना संक्रमण नही हो सकता क्या? और ना अभी तक हमने कोई ऐसा case सुना है कि किसी सरकार ने दावा किया हो की  हमारे देश मे भी इतने कुत्ते की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है या ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने lockdown का पालन नही क्या था।
    चलिए अब बात developed ठंडे प्रदेशों में रहने वाले लोगों की करते है वहाँ समान से मौसम रहने के कारण उनका शरीर उतना वातावरणीय आपदाओं का सामना करने के मौके नही मिलते है । दूसरी बात वहां के स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छे होने के कारण लोग छोटी सी बीमारियों में भी दवा का सेवन करते है।  वो जल्द तो ठीक हो जाते है पर इसके कारण उनका immune power उतना develop नही हो पाता जितना कि बिना दवाई लिए लोगों के रोग अपने आप ठीक होने वाले लोगों का होता है।
एक उदाहरण से समझिये एक viral बीमारी small pox के बारे में तो सुना ही होगा ।यह अक्सर बच्चों को हुआ करता है । यदि यह भारत मे किसी  गाँव देहात के बच्चों को हो जाता है तो गांव के लोग इसे माता जी के नाम दे देते है अर्थात उनके अनुसार देवी देवताओं के वजह से हुआ है और वे medical treatment लेने के स्थान पर झार- फुक करवाते है। और कुछ दिनों के बात जब मरीज ठीक हो जाता है तो उन्हें और अधिक विश्वास  हो जाता है कि झार फुक के वजह से ही ठीक हुआ है। पर सच मे तो यह बिल्कुल सफेद झूठ है क्यों- कि आपने बाहरी डॉक्टर से इलाज भले न कराया हो पर हमारे शरीर के अन्दर बैठे smart doctor वो अपना काम 24x7 hrs कर रहे होते है और हम ठीक इनके वजह से हुए है ना कि झार फुक के वजह से । और जब द्वारा small pox के virus इस मरीज पर कभी अटैक करेगा तो इसे प्रभावित होने के chance न मात्र है क्योंकि इसका immune power इस virus से लड़ने के लिए develop हो चुका है ।
       मान लीजिए कि यह small pox बीमारी किसी अमेरिकन के बच्चे को हो गया हो तो वह तुरंत मेडिकल treatment करवाएगा  और इसके बच्चे को जल्द ठीक हो जाने के chances बढ़ जाएगा पर इसका immunity power इतना develop नही हो पायेगा जितना कि बिना इलाज किये बच्चे का होगा इसलिए अमेरिकन बच्चे को द्वारा कभी भी small pox के virus attack करता है तो इसे इस बीमारी के होने के chances  बिना इलाज किये ठीक हुए बच्चे से अधिक होगा ।

               
                 
               कैसे करे कोरोना से बचाव

 1. यह बहुत जरूरी है कि कोई भी  व्यक्ति से आप जब बात कर रहे है तो मास्क लगाए , मास्क नही है तो मुँह को रुमाल, या गमछी से ढके। यदि आपको कोरोना से बचाना है तो यह बहुत जरूरी नही  बहुत बहुत बहुत......बहुत बहुत बहुत बहुत ......... जरूरी है।

2. जब आप बात कर रहे है तो normal रूप में बात करे। यह कोशिश  करे कि आपके face front to front position में न रहे । ज्यादा जोर से चीख कर ,चिल्लाकर कर बात न करे।

3. गर्म पानी से कुल्ला करें चुकी हो सकता है कि जो कोरोना के कण आपके मुँह में गया है वह अभी तक  आपके throat के पास mucus में चिपका हो। अन्दर न गया हो। ऐसा करने से मुँह से बाहर आ सकता है और आप infection से बच सकते है।

4. यदि आप कोरोना से संक्रमित है तो आप गर्म पानी का भाप ले इससे कोरोना तो नही मरेगा पर आपके lungs में हुए सूजन में थोड़ा कमी आ सकता है।

5. Plasmatherapy के लिए blood  stage 2 critical मरीजों का लें न कि stage 1 मरीज़ो का।

6. हमे ac के प्रयोग से बचना चाहिये खासकर उसे जो  AC का प्रयोग बहुत से लोगों के लिए करता है जैसे mall में, restaurant में, घरों में जहां एक ac का प्रयोग  a group of people करते है।

7. Balanced diet लेते रहे ताकि आपका शरीर के health staff ( immune system) काम करने के लिए फिट रहे।

8. यदि आप घर से बाहर जाते है तो वापसी के बाद  सैनिटाइजर का प्रयोग करे तथा अपने मास्क और पहने हुए कपड़े को उतारकर कड़ी धूप में  छोड़ दे ।
9.  हमेशा एक मास्क , रुमाल का प्रयोग न करे । कम से कम 3  mouth cover kits रखे । मान लो एक को आज use किया तो उसे कल use न करे ।उसे कड़ी धूप में कोरोना के कण को मरने के लिए छोड़ दे।

10. वैसे लोगों से अधिक बात न करे जो एक दिन में अधिक लोगों से मिलते है। जैसे ठेले पर चाय या सब्जी बेचने वाले, बैंक के कर्मचारियों से, डॉक्टरों से , सड़क पर खड़े पुलिस वालों से। यदि बात करना जरूरी है तो मुँह नाक को ढक ले।

11. यदि  आप एक वयस्क है और आपको खाँसी, जुकाम है तो पुष्टि के लिए पहले इस बात पर फोकस करें कि कहि आपके area में कोरणा के मरीज तो नही है जहाँ आप जाते रहते हो। क्योंकि आम खाँसी जुकाम होने के chances बड़े लोगों को कम होता है।

       
        
      आरोग्य सेतु app no data no smartphone

भारत सरकार के द्वारा लॉन्च की गई आरोग्य सेतु app एक प्रसंशनीय कदम है जो हमे कोरोना वायरस के आँकड़े से update रखती है तथा हमारे द्वारा input की गई data के आधार पर हमारी security सुनिश्चित करती है । पर इस app से उन लोगों को फायदा होगा जिनके पास स्मार्टफोन हो और  data भी हो। साथ ही साथ पढ़ा लिखा भी हो। हमारे देश मे ऐसे करोड़ों लोग है जिसके पास स्मार्ट फ़ोन तो है पर उन्हें पढ़ना लिखना नही आता । कुछ पढे लिखे लोग भी इसे use करना नही चाहते क्योंकि वे नही चाहते कि सरकार उन्हें ट्रैक करे । उनके गतिविधियों पर 24x7 घंटे नजर रखे। बाकी बचे  लोग जिनके पास स्मार्टफोन तो नही होते पर एक simple phone होते हैं चाहे वे जूता बनाने वाला मोची हो या किसी गाँव का गरीब किसान। ऐसे लोग पढ़े लिखे भी नही होते है। तो ऐसे लोगों को क्या आरोग्य सेतु app मदद कर पायेगा । जी नही। सच कहें तो वैसे लोगों को ही कोरोना की सही जनकारी की अधिक जरूरत है कि कोरोना क्या है , कैसे फैलता है,कैसे बचें। इन समुदाय के लोगों में कोरोना के बारे में अफवाहों का  बाजार लगा रहता है । चाहे वे अशिक्षित हो या गरीब,महिला हो या पुरुष । ऐसे लोगों को कोरोना की सही जानकारी होना ज्यादा जरूरी है । जैसे आज तक पर काम कर रहे रोहित सरदाना आरोग्य सेतु app download नही भी करते है तो चलेगा क्योंकि वे इतने सक्षम है कि आँकड़े कहि न कही से जुटा लेंगे और किसी फैल रही अफवाह से भी अपने को बचा लेंगे पर उसके बारे मे क्या जो किसी गाँव की एक अशिक्षित गरीब महिला है जिसके बच्चे को सामान्य खाँसी है पर वो  इस अफवाह में जी रही है कि कहीं मेरे बच्चे को कोरोना तो नही हो गया है और इस लिए कई दिनों से डर से सो भी नही पा रही है। इस लोकडाउन के वक्त में जानकारी लेने के लिए उसके पास माध्यम है तो सिर्फ एक 500 रुपये का simple फ़ोन पर वो फ़ोन करे तो किसको करे क्योंकि उनके contact list नंबर तो उनके ही जैसे लोगों के है। ऐसा लोगों को अफवाह से बचाने और उसके सवालों के जवाब देने के लिए सरकार को mobile doctor programme लॉन्च करना चाहिए । यह दो चरण में काम करेगा । पहले चरण में caller को mobile guide करेगा जो कि fully researched एक pre-recorded robotic audio होगा । दूसरा चरण में सरकार  द्वारा नियुक्त की गई health expert टीम। अब आप सोच रहे होंगे कि जब expert टीम है तो फिर mobile voice की क्या जरूरत। इस सवाल का जवाब मैं आपसे पूछता हूँ कि यदि आपको आम खाँसी सर्दी के लक्षण दिख रहा हो और आपके पास दो options है अपने doubt को clear करने के लिए
1. गूगल करें
2. सरकारी मेडिकल expert टीम को call करें
  मुझे लगता है कि आप first ऑप्शन को चुनेंगे क्योंकि आप नही चाहेंगे कि मुझे मेडिकल टीम अपने ambulance में उठाकर लेकर चले जाएं जबकि आप जानते है कि मुझे कोरोना नही है बस मैं यू ही थोड़ा संदेह को दूर करने के लिए किया था।
     जब आपके मन मे थोड़ा झिझक है तो सोचिये कम पढ़े लिखे लोगों के मन मे तो और सरकार के प्रति उल्टा पुल्टा विचार रहता है।
   अब mobile doctor काम कैसे करेगा । यह काम करेगा telecom कंपनियों और सरकार के सहायता से ।
सरकार जनता को वैसे मोबाइल नंबर provide।करेगी जो सबके लिए आसान हो जैसे customer care के नंबर 121 या 198 सभी को पता है या एक और नया नंबर जारी करे जो सबको मालूम हो और ये हो सकता है  2020 चूँकि सभी को मालूम है कि कौन सा साल है । अब जैसे ही कोई भी लोग इस नंबर पर call करेगा तो पहले इसे mobile guide करेगा और यदि वह चाहता है कि उसकी बात medical expert से हो तो मोबाइल उसके call को transfer कर देगा। यह by default नही होगा यह कॉलर के choice पर होगा।

    चलिए उदाहरण से समझते है । एक गरीब महिला  है जो कि गांव की रहने वाली है । उसने अपने एयरटेल सीम से  किसी एक नंबर पर कॉल की । 
Dailoge start ........

Mobile
यदि आप कोरोना क्या है,कैसे फैलता है , इससे कैसे बचें की जानकारी चाहते है तो 1 दबाए।
यदि आपको सन्देह है मुझे कोरोना तो नही हो गया। पुष्टि करना चाहते है तो 2 दबाए।
यदि आपको एयरटेल से संबंधित जानकारियां चाहते है तो 3 दबाये।
महिला .........
वो सिर्फ कोरोना के बारे में तथा अफवाहों से कैसे बचें के बारे में जानना चाहती है इसलिए उसने 1दबाया।
Mobile......
अब मोबाइल इसके सवालों की पूरी जानकारी एक research रूप में देगी जो पहले से ही  input होगा। ताकि इसका मन मे एक भी सवाल का जवाब अधूरा न रह जाय।

Condition ....2

मान  लो उस औरत के बच्चे को जुकाम है और वह डरी हुई है और यह पुष्टि करना चाहती है कि उसके बच्चे को कोरोना तो नही।
तो      वह 2 press की।

अब मोबाइल कुछ सवाल पूछेगा।
मोबाइल----- मरीज की उम्र क्या है ।जैसे यदि उम्र 5
साल है 5 अंक press करे। या 20 साल है तो 2 और 0 को press करे

महिला

चुकी बच्चा 4 साल का इसलिए महिला ने 4 अंक press किया।
 मोबाइल .... चूँकि बच्चा 4 साल का है इसलिए उसे घर से बाहर जाने के chances न के बराबर है । इसलिए यदि कोरोना हुआ होगा तो उसके किसी family member के द्वारा ही। तो मोबाइल का सवाल होगा।
क्या परिवार के किसी भी सदस्य को खाँसी,जुकाम,बुखार है।
यदि है तो 1press करे अन्यथा नही है तो 2 press करे।

महिला - नही 2  दबाया

Mobile ...….. confirmation  को solid करने के लिए अगला सवाल
क्या आपके गाँव, मुहल्ला या 1Km के दयारे में कोई कोरोना का मरीज मिला हो?
यदि है तो 1 प्रेस करे अन्यथा 2 दबाएं।
 महिला- नही 2 press किया ।
 अब मोबाइल डॉक्टर confirm हो जाता है कि बच्चे को common cold है ना कि कोरोना ।
  Mobile result........  आपके बच्चे को कोरोना नही बल्कि आम सर्दी जुकाम है ।
  अंत मे मोबाइल  मेडिकल expert टीम से बात करने के लिए अंक 9 dial करने का सुझाव भी देगा ताकि उसकी संतुष्टि को और अधिक बल मिल सके और वह relax हो सके ।पर यह choice महिला का होगा कि वह बात करे या न करे ।

 Condition 3 

यदि महिला सारे सवाल का जवाब 1 press कर हाँ में दे देती तो 
Mobile answer....…. हाँ हो सकता है कि आप कोरोना से संक्रमित है । और मोबाइल call  को मेडिकल expert को ट्रांसफर करने के लिए 9 दबाने को कहता। 
Note  - यहाँ पर मोबाइल कॉल को  by default टीम के पास transfer कर सकता था पर यह choice महिला के पास ही छोड़ा ।
  चुकी हो सकता है कि  महिला यह test कर रही हो कि आखिर यह सिस्टम काम कैसे करता है।
या हो सकता है कि गलती से सारे सवालों का जवाब  हाँ में दे दी जिसे वह सच मे नही देना चाहती थी। 
या उस समय वो घबराई हुई हो और अभी बात नही करना चाहती हो । 
इसलिए वह कभी भी द्वारा call  कर सकती है।

  Note ----- मोबाइल के द्वारा पूछी जाने वाली सवाल  मरीज के उम्र के अनुसार होगा । यदि बच्चा 30 साल का होता तो सवाल भिन्न होते न कि पूछे गए सवाल के जैसा।
  



  





       
  















      
        




     

          
     
          





  

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