क्या कोरोना सिर्फ खाँसने, छीकने नही बल्कि बोलने से भी फैल सकता है ?

     

        सिर्फ खाँसी से नही बोलने से भी फैलता है कोरोना


आज कोरोना पूरी दुनिया मे अपना पैर तेजी  से पसारता जा रहा है ।दुनिया के ताजा आंकड़े इस वायरस की संक्रमण की गति क्या है इसकी गवाह है। इस वायरस की फैलने की वजह खाँसना या छिकना बताया जा रहा है। और दूसरी तरफ ये भी तर्क दे रहे है कि आधे से अधिक कोरोना के patient वैसे मिल रहे है जिनमे कोई खाँसने या क्षिकने के कोई लक्षण ही नही है। तो   क्या सिर्फ खाँसने या छीकने से यह वायरस की फैलने की गति क्या इतना तेज हो सकती है जितना बड़ी रफ्तार  से यह फैलता जा रहा है?
         इसकी फैलाव की वजह सिर्फ खाँसना या छिकना नही बल्कि बोलना भी है । हाँ यह सुनने में अजीब सा है क्योंकि न हम जानने की प्रयास की है और न ही दुनिया ने बताया है । पर  इस शोधपत्र को अंत तक पढ़ने के बाद आप भी आस्वस्त हो जाएंगे कि बोलना भी एक वजह हो सकती है।

 इस बात की पुष्टि करने से पहले हम यह जान लेते है कि किसी बाहरी unwanted सूक्ष्मजीव के हमले से हमारा शरीर कैसे काम करता है?
 पहले आपको बता दु की हमारे शरीर मे भी डॉक्टर, अस्पताल, लैब होते है पर ये हमारे जैसे मानव निर्मित नही बल्कि प्राकृतिक निर्मित चूँकि हमारे शरीर पर रोजाना किसी न किसी सूक्ष्मजीवों का हमला होते रहता है और हमारे शरीर के medical staff टीम हमेशा दुश्मनों से मुकाबला करते रहते है और हमे बचाते रहते है और हमे पता भी नही चलता। आपके मन मे एक सवाल जरूर उठ रही होगी कि यदि हमारा शरीर का medical department fail हो जाय या न रहे तो हमे क्या होगा?
यदि ऐसा हुआ तो हम भी जीवित नही रहंगे और हमे दुनिया के कोई भी डॉक्टर  या दवा नही बचा सकता । एक उदाहरण से आप अच्छी ढंग से समझ पाएंगे। अपने HIV वायरस या एड्स बीमारी  के बारे में सुना तो होगा । यह सूक्ष्मजीव हमारे शरीर के medical डिपार्टमेंट (immune system) को नष्ट कर देता है । जिसके कारण हमारी शरीर छोटे से छोटे दुश्मनों का भी  सामना नही कर पाता है और हमारी मौत एक छोटी सी फोड़ा या common minor disease  से हो सकती है जबकि इन रोगों की दवा दुनिया मे महजूद है । अब आप सोच  सकते है कि  nature made health department का कोई भी विकल्प दुनिया मे नही है।
   चलिए हम अपनी मुद्दे की बात पे आते हैं हम इस बात की चर्चा कर रहे थे कि हमारा शरीर unvisible दुश्मनो से सामना कैसे करता है ?
हमारा शरीर बाहरी दुनिया की तरह ही दो stage में काम करता है।
1. Normal stage  - जब हमारे शरीर मे अनचाहा जीव प्रवेश करता है तो हमारा doctor relax way में काम करता है । वह उस जीव को मारने के लिए पहले से महजूद दवाइयों का इस्तेमाल करता है जब इस दवाइयों का असर नही होता है और दूसरी तरफ  वह जीव हमारे शरीर के biomechanism को unbalance करना शुरू कर देता है तो हमारे शरीर के डॉक्टर अलर्ट हो जाते हैं। उसे अभास हो  जाता है कि यह जीव वह नही जैसा हम सोच रहे है। यह एक नया है। और इससे झूझने के लिए stage 2 operation चालू करता है।

2. Emergency stage - चूँकि नए दुश्मन होने के वजह से हमारे शरीर के पास उसे मारने के लिए perfect antibody नही होते है। इसलिए इस स्टेज में हमारे शरीर को एक समय मे अनेक काम करने पड़ते हैं । महजुदा दवाइयों से ही इलाज कर रहे होते हैं और दूसरी तरफ    इसका antibody ढूढ़ने के प्रयास भी कर रहे होते है। चूँकि हमारा दुश्मन भी अपने संख्या में बढ़ोतरी कर हमारे organ को प्रभावित करता है इसलिए इसकी संख्या को कम करने के लिए हमारे शरीर से बाहर निकाल रहा होता है। जैसे यदि इन्फेक्शन पेट मे हो तो इसे मल के माध्यम से बाहर करता है। यदि इंफेक्शन lungs में हो तो खांस या छिक के माध्यम से बाहर करता है। सिर्फ शरीर से ही बाहर नही करता बल्कि बाहर से अन्दर आ रहे जीवों को भी रोकता है इसलिए अपने देखा होगा कि जब हमें lungs viral इन्फेक्शन होता है तो हमारे nose और throat में mucus बनना चालू हो जाता है । जानते है क्यों? ताकि वे बाहर से आ रहे अज्ञात दुश्मनों को रोक सके ।
       चलिए अब हम बात करते है कोरोना वायरस के संक्रमण के बाद हमारा शरीर कैसे response करता है और एक संक्रमित व्यक्ति दूसरे को कब और कैसे संक्रमित कर सकता है। जब कोरोना किसी पर attack करता है तो उसका शरीर pre-attacker मानकर normal (stage1) रूप में treat करता है ।पर जब पहले से महजूद संसाधनों से कोरोना पर कंट्रोल नही हो पाता है तब emergency treatment ( stage 2) चालू करता है। और इसी दौरान खाँसी या बुखार के लक्षण दिखने लगते है। stage 1 से stage 2 में मूव करने में कितना दिन लगता है यह मरीज के शारीरिक प्रतिरोधक क्षमता   ( immune system) के मजबूती पर निर्भर करता है।बच्चे और बूढ़े में लक्षण जल्दी दिख सकते हैं क्योंकि बूढ़े व्यक्तियों के immune system weak हो जाते है जबकि बच्चे के immune system  develop नही हो पाते हैं। आश्चर्य की बात यह है कि बहुत से दुनिया मे ऐसे व्यक्ति होंगे जिन्हें कोरोना  हुआ होगा और बिना medical treatment के ही ठीक हो गए होंगे और उन्हें पता तक भी नही चला होगा कि उन्हें कोरोना जैसे वायरस से वे संक्रमित हो गए थे।

        अब मैं आपसे कुछ सवाल पूछता हूँ कि जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति जब वह stage 1 में रहता है और उस दौरान उसे खाँसी या छिक जैसी लक्षण भी दिखाई नही देता है तो क्या वह इस दौरान कोरोना फैला रहा होता है और यदि हाँ तो कैसे? दुनिया के अनुसार कोरोना का फैलाव खाँसने या छीकने से होता है  बोलने से नही तो आखिर ऐसा क्यों?   कुछ तो कारण इसके पीछे होगा । चलिए आज आपको हम समझाते है।जब हम emergency stage में होते है तो हमारा शरीर सिर्फ antibody  develop करने में सिर्फ नही जुटा रहता है बल्कि वे इस बात की ध्यान रखते है कि आखिर इस नए दुश्मन से कौन से organ प्रभावित हुए है और इसे antibody develop होने तक temporarly इसे कैसे प्रभाव से दूर रखा जाए।
       जैसे कोरोना वायरस हमारे lungs को अधिक प्रभावित करते हैं और इस दौरान हमारे immune सिस्टम के पास दो ही ऑप्शन होते हैं । मौजूदा दवाइयों से इलाज करें या शरीर से इसे बाहर निकाले। इसलिए इसे बाहर करने के लिए खाँसी जैसे लक्षण आते है। पर सवाल यह उठता है कि खाँसी के दौरान ही क्यों ? सामान्य रूप से जब हम साँस लेते है या बोलते है तब क्यों नहीं ? इसे समझने के लिए हमे यह जानना होगा कि हमारा lungs काम कैसे करता है?
     हमारा शरीर में फेफड़े का काम गैसों को filter कर हमारे शरीर को मुहैया कराना  है जो हमारे शरीर को भोजन बनाने के लिए जरुरी है और उसे बाहर करना है जो cell में   भोजन बनाने के दौरान बनता है। जैसे O2 और CO2 । इन गैसों का अदान-प्रदान सामान्य श्वसन क्रिया के दौरान होते रहती है पर कोरोना के कण सामान्य श्वसन के दौरान हमारे शरीर से बाहर नही हो सकता । इसका कारण है कोरोना की size को O2 & CO2 से बड़ा होना । O2 का size 0.3 nm होता है , CO2 का size 0.25 nm होता है जबकि कोरोना वायरस का size 60 nm होता है। अर्थात काफी बड़ी होती है इसलिये इसे हमारे शरीर से बाहर निकालने के लिए  हमारे lungs के वायुकोष के छिद्र को सामान्य से बड़ा करना होता है और ऐसा करने के लिए हमारे lungs के नीचे महजूद diaphragm muscle tissue lungs को जोर से धक्का देकर press  करता है जिसके कारण वायुकोष में present हवा तेजी से बहुत कम समय के अंतराल में बाहर आते हैं । इस दौरान वायुकोष के hole  inflate हो जाते हैं और फेफड़े में महजूद बड़े कोरोना कण बाहर आ जाते है। इसलिए अपने खाँसते या क्षिकते समय कभी गौर करा होगा की इस दौरान वायु अधिक मात्रा में बाहर आता है।   इसे अच्छी से समझने के लिए आप dairy से एक दूध का पैकेट ले और और उसमें एक सुई लेकर छिद्र कर दे । और आप धीरे से पैकेट को press करें आप देखेंगे कि एक पतली से  दूध की फवारा निकलेगी । अब आप इसे जोड़ से press करे ।इस बार दूध की फवारा के धार मोटी हो जाएगी औऱ तेजी से बाहर आएगा । ऐसा इसलिए हुआ चुकी पैकेट प्लास्टिक का बना होता है जो nature में flexible होता है । आपके द्वारा लगाए गए अधिक pressure के वजह से इसका hole inflate हो गया । हमारा lungs तो soft muscle tissue का बना होता है  तो इसके तो flexibility और अधिक होती है।
 अब हम इस बात को देखेंगे कि क्या कोरोना  बोलने से फैल सकता है? यह 100% दावे से नहीं कह सकते पर इंकार भी नही क्या जा सकता। यह इस बात पर निर्भर करता है कि हम किस तीव्रता से बोलते है और हमारा बाहरी वातावरणीय वायु दवाब क्या है। क्योंकि जब हम विज्ञान के आधार पर खाँसी, छिक और बोलने में तुलना करें तो हम एक सा ही काम कर रहे होते है। हम तीनों cases में lungs से हवा बाहर निकाल  रहे होते है। अंतर बस इतना कि खाँसते या छीकते समय हमारा air pressure अधिक होता है जबकि बोलते वक्त कम।
पर हम जब चिल्लाते या चीखते है या  जोर  से पुकार लगाते है तो इस केस में तेज ध्वनि उत्पन करने के लिए  हम high pressure के साथ हवा lungs से बाहर निकालते है जिसके कारण वायुकोष के inflate होने के chances बढ़ जाते हैं। और संभव है कि उस दौरान कोरोना के कण बाहर आ सकते है। इसे आप एक trial  test कर के देख सकते है । आप अपने  हाथ को पेट के पास रखे और feel करे कि आप कोरोना के patient है और आप खाँसने की acting करे आपको महसूस होगा कि आपका lungs तेजी से सिकुड़ा। अब आप एक शब्द  चुप  थोड़ा जोर से बोलिये  या जोर से हँसिये । इस बार भी आपका lungs पहले के जैसा ही सिकुड़ता हुआ feel होगा पर थोड़ा कम ।
      दूसरी तरफ संभव को और अधिक संभव बनाने में मदद करता है बढ़ती तापमान। चूँकि भारत  गर्मी की ऋतु की ओर बढ़ रहा है और वातावरण का तपमान भी तेजी से बढ़ रहा है जिसके कारण बाहरी वायुदाव भी घट रहा है । इस वजह से हमारा शरीर के रक्त दबाव और वायु दबाव के बीच अंतर भी बढ़ रहा है। जो कि कम तीव्रता के आवाज उत्पन मात्र से ही वायुकोष के inflation के chances बढ़ा देता है।
इसे कुछ दैनिक जीवन मे घटित होने वाली उदाहरण से समझिए । गर्मियों के समय मे  जो बच्चे धूप में खेल रहे होते है उनका नाक से कभी कभार blood आ जाता है । मालूम है क्यों?  क्योंकि जब वे खेल रहे होते है तो उनका रक्तदाब बढ़ जाता है और बाहरी वायुदाब तपमान बढ़ने की वजह से कम हो जाता है जिसके कारण दबाव के अंतर बढ़ जाता है और ब्लड वायुकोष से बाहर आ जाते है। चलिए दूसरा उदाहरण से समझते है यदि किसी मानव को space में ले जाकर छोड़ दिया जाय तो मालूम है उसके साथ क्या होगा उसके lungs के वायुकोष फट जाएंगे और मुँह नाक से blood बहना चालू हो जाएगा ।ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि बाहरी वायुदाब  शून्य होने के कारण  रक्तदाब  और इसके बीच के अंतर काफी अधिक हो जाता है। आपको यह सुनकर आश्चर्य होगा जब blood cells के size जानेंगे ।इसका साइज 7000 nm होता है। यानी यदि हम कोरोना की तुलना एक नवजात बच्चे से करे तो आप blood cells को एक हाथी के आकार का मान सकते है।
और आप।खुद अंदाजा लगा सकते है कि जब फेफड़े से blood cells बाहर आ सकता है तो कोरोना क्यों नही?
   
       लोगों को यह भी लगता है कि जब कोई कोरोना के मरीज ख़ासेगा तभी सिर्फ कोरोना के कण बाहर आयेंगे जो कि एक गलत सोच है । जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति खाँसता है तो उस दौरान lungs से निकले सारे कोरोना कण एक साथ नही वातावरण में बाहर आ जाते हैं उसमें से कुछ कण हमारे नमीनुमा आंतरिक मुँह के त्वचा,  या अन्य गीली जगह जैसे throat ,wind pipe में चिपक जाते हैं और जब वो सामान्य रूप से बोलते है तो वो वाष्प कण के साथ बाहर आते हैं । इसलिए अपने कभी गौर करा  होगा कि जब हम अधिक लगातर बोल रहे होते है तो हमे पानी पीने की जरूरत होती है क्योंकि हमारी मुँह के अंदर के गीली त्वचा पानी के कण को वाष्पित हो जाने के कारण सुख जाते हैं। कोरोना से संक्रमित लोगों को खुले सार्वजनिक जगहों पर थूकना भी नही चाहिये क्योंकि उसमें भी कोरोना के कण चिपके  हो सकते हैं।
अब हम उस सवाल के जवाब तलासने की कोशिश करते हैं जो मैंने आपसे पूछे थे कि क्या कोरोना के कण first stage संक्रमण के दौरान भी बाहर आते हैं क्योंकि इस दौरान तो हमे खाँसी या छिक जैसी कोई लक्षण भी दिखाई नही देता। इसका जवाब हम दुनिया मे आ रही संक्रमण के आँकड़े से देखते है । दुनिया मे  बहुत से ऐसे कोरोना संक्रमण के मामले गुच्छे में आ रहे है जिसमे कोई लक्षण तो नही दिखते पर सारे गुच्छे के लोग कोरोना संक्रमित होते है । आखिर जब कोई खाँसने या छीकने के कोई लक्षण ही नही है तो कोरोना फैला कैसे । क्या इसकी  वजह बोलना तो नही???
  दुनिया मे कोरोना मरीजों  को देख रहे डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना संक्रमित लोगों में गीली खाँसी के लक्षण नही बल्कि सुखी खाँसी के लक्षण देखने को मिल रहा है। यह हमारे सन्देह को और बढ़ा  देता है । पहले इस बात को समझते है कि आख़िर  किन परिस्थितियों में किसी को गीली या सुखी खाँसी आ सकते है और सुखी खाँसी  गीली खांस से कितना खतरनाक है । खाँसी गीली या सुखी आएगी यह आंतरिक air pressure पर निर्भर करता है जिस समय आपको गीली खांस आएगा उस समय अधिक मात्रा में एक जोर धक्का के साथ हवा बाहर निकालते है जिसके कारण जब हवा फेफड़े से होकर brochi,  trachea  larynx, से होते हुए बाहर आती है तो windpipe( bronchi, larynx) के internal सतह के चारो ओर चिपचिपी सी liquid पदार्थ mucus जमी होती है (जो unwanted कणों को trap कर फेफड़ों में जाने से बचाती है ) उसे भी अपने साथ कर हमारे शरीर से बाहर करता है और breathing रास्ते को साफ करता है इसलिए   यदि आपको कभी गीली खाँसी आयी होगी तो आपने गौर करा होगा कि mucus का एक थक्का या चिपचिपा droplets आपके throat से बाहर आया होगा जिस हम आम बोलचाल की भाषा मे खरास कहते  है । जबकि सुखी हुए खाँसी में ऐसा कुछ नही होता । हवा कम मात्रा में low pressure के साथ बाहर आता है। अर्थात कोरोना lungs infection में सुखी खाँसी आने का मतलब हमारे वायुकोष को कोरोना के कण को बाहर करने के लिए अधिक inflate होने की जरूरत नही पड़ती है।
      कुछ ऐसे भी कोरोना के cases देखने को मिल सकते हैं जिसे कहा जा सकता है कि कोरोना आपके घर के दरवाजे तक गया कुछ समय के लिए ठहरा और बिना आपके घर मे इंट्री किये, उत्पात मचाये वापस चला गया हो मतलब मेरे कहने का अर्थ यह है कि हमारे शरीर उन्ही चीजों को अपने अंदर आने देता है जो हमारे शरीर के biomechanism को maintain करने के लिए जरूरी होता है बाकी को जो अनावश्यक है उसे रोकने की भरशक प्रयास करता है और ऐसा करने के लिए हमारे नाक और मुँह के throat में चिपचिपी viscous liquid पदार्थ महजूद रहता है जो unwanted कण को पकड़ के रखता है और जब saturated हो जाता है तो शरीर उसे खांस या छिक के माध्यम से बाहर करता है । उदाहरण के लिए आपने कभी ऐसा जगह काम किया हो जहाँ धूल के कण उड़ता रहता हो जैसे cement कारखाने या किसान के रूप में खेतों में आदि तो आपने देखा होगा कि आपको जोर से छिक या खाँसी कभी कभी आती होगी। जबकि आपको न कोई सर्दी जुकाम है ना कोई रोग ।
       ठीक इसी प्रकार जैसे कोरोना हमारे नाक से  या मुख से प्रवेश करता है तो वह mucus से चिपक जाता है । हो सकता है यह कई दिनों तक यहाँ ही चिपका रहे या जब आप खाना खाएं, या पानी पिएं या श्वास अंदर खिंचे तो यह आपके शरीर मे प्रवेश कर गया हो । ऐसा भी हो सकता है कि बोलने वक्त , या खाँस छिक के माध्यम से आपके शरीर से बाहर आ गया हो। और आप शिकार होते होते बच गए हो।
         इसे जाँच के माध्यम से सत्यापित भी किया जा सकता है । हम कोरोना infected होने या न होने की test हम दो तरह से करते हैं।
1. Nose या मुख से mucus collect कर
2. Blood test कर
 अब आप ऐसे 50 मरीज को लीजिये जो देखने मे बिल्कुल स्वस्थ हो पर इसका mucus टेस्ट किया गया तो वह कोरोना से infected निकला हो । मतलब वह patient stage 1 का हो न कि stage 2 ।
    अब इन सभी लोगों का blood test कीजिये इस case में आपको कुछ चौकाने वाले आँकड़े मिल सकते है।  हो सकता है कि आपको इस टेस्ट में 10 -20  लोगों का test negative आए। जो कि mucus test के जाँच में positive थ।

वैसे राज्यों   की घनी आबादी वाले शहर जहां वातावरण का तापमान अधिक है  और तेजी से बढ़ रहा है वहां कोरोना physically कमजोर हो सकता है । तथा लोगों को हानि पहुचाने कि दर में कमी देखी जा सकती है क्योंकि बाहर वायु में  अधिक moisture ( पानी के कण) न रहने के कारण per water molecule में कोरोना को चिपके रहने की संख्या बहुत कम रहेगी। और  लोग कम infected होंगे।
 पर बढ़ती तापमान दूसरी समस्या यह उत्पन कर देगी की वायुदाब को काफी कम कर देगी जिसके वजह से बोलने की वजह से कोरोना को फैलने की chances अधिक हो जायँगे।
   यह परिणाम हमे ऐसे राज्यों  के high density वाले शहर में तेजी से बढ़ती नजर आएगी जहाँ तापमान तेजी से बढ़ रहा है।  लोगों की चहल - पहल अधिक हो और वहाँ के लोग झुंड में इकट्ठा होकर बात करने में मशहुल हो । जैसे राजस्थान, महाराष्ट्र, आंध्रा, तमिलनाडु,केरला, गुजरात , दिल्ली आदि। ज्यादा दक्षिण भारत के राज्ये होंगे क्योंकि यहां के तापमान अन्य राज्यों के मुकाबले काफी अधिक है।

बोलने की वजह से कोरोना फैल सकता है इसका live उदाहरण आपको ऐसे group के लोगों में देखने को मिल सकता है जो अधिक  भिन्न भिन्न स्थानों के लोगों से मिलते है और उनकी बीच की बातचीत नोक झोंक के साथ होते रहती हो जैसे अभी lockdown के समय मे  सड़क पर  पहरेदारी कर रहे पुलिस, hospital के staff ।
 

     


   
     




   

       
   
       







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