क्या कोरोना से भारत मे कम होंगे मौत के आँकड़े ?




यदि भारत के स्वास्थ्य system सही से work करे और कोरोना संक्रमित लोगों को स्टेज 1 में ही detect कर लिया जाय तो हमारे देश मे मौत के आँकड़े ठंडे प्रदेशों के उपेक्षा कम हो सकती है। दुनिया के महानतम वैज्ञानिक charles darwin बताते है कि वैसे प्राणी जो वातावरण में हो रहे बदलाव और किसी बाहरी आक्रमण को झेलते रहते है उनका  survive करने के chances बढ़ जाते हैं। अर्थात आपका शरीर का प्रतिरोधक क्षमता कितना मजबूत हुआ है और मौजूदा परिवेश में रहने के लिए आप कितना fit कर चुके है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितने आपदाओं के सामना किये हैं।


   हमारा भारत देश अनेक ऋतुओं का देश है जैसे सर्दी, गर्मी, बरसात,बसन्त ।  हमारे देश मे एक सा समान मौसम नही रहता है । यहाँ गर्मियों के दिनों में अधिक गर्मी तो जाड़ो के दिनों में अधिक ठंड पड़ती है । एक विकासशील देश होने के कारण न ही हमारा स्वास्थ system उतना  develop है  ना ही service सेक्टर । हमारा तीन चौथाई  आबादी प्राकृतिक छत के नीचे काम करके अपनी रोजी रोटी कमाते है ।चाहे  मौसम शरीर को जला देने वाली हो या ठंड हड्डिया गला देने वाली ।बरसात हो या तूफान । हम लोग  लगे रहते है । थोड़ी बहुत तबियत बिगड़ी तो  अपने से ही ठीक होने का इंतजार करते है या देशी इलाज अपनाते है। हम  भारतीय को अपने को ecosystem में बनाये रखने के लिए अधिक प्रकृति आपदाओं से संघर्ष करना पड़ता है । हमारा शरीर के immune system संघर्ष करते करते मजबूत हो जाता है और हमेशा दुश्मनों के सामना करने के लिए तैयार रहते हैं।
आपने कभी अख़बारों  में पढ़ा है कि जंगल मे रह रहे शेर ने शेरनी को , सड़कों पर घूम रहे आवारा कुत्तों ने अपने को किसी अस्पताल में  भर्ती कराया हो । क्या वे हमारी तरह हवा नही लेते । उन्हें इंफेक्शन नही हो सकता । क्योंकि वे हम मानव की तरह AC के कमरे में नही रहते न ही एक स्थान से दूसरे स्थान जाने के लिए कोई कार का इस्तेमाल करते हैं । वे सब खुले वातावरण में रहते है , गिरे फेक्के भोजन खाते है। फ्राई हुए मांस के स्थान पर कच्चे माँस  खाते हैं । इसलिए उसे बीमार पड़ने के chances हम मानव जाति से अधिक रहता है पर वे प्राकृतिक आपदाओं से संघर्ष करते करते अपने immune system को इतना develop कर लेते है कि मानव जात के लिए घातक लग रहे संक्रमण उनके लिए आम हो जाते हैं।


 आप अभी अपने देश भारत का example ले लीजिए जहां हम  मानव जात अपने अपने घरों में दुबककर बैठे हैं  वहां  दूसरी तरफ आवारा कुत्ते सड़कों पर मस्ती से घूम रहे है क्या उनके मुख या श्वास के जरिये कोरोना संक्रमण नही हो सकता क्या? और ना अभी तक हमने कोई ऐसा case सुना है कि किसी सरकार ने दावा किया हो की  हमारे देश मे भी इतने कुत्ते की कोरोना संक्रमण से मौत हुई है या  ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उसने lockdown का पालन नही क्या था।
    चलिए अब बात developed ठंडे प्रदेशों में रहने वाले लोगों की करते है वहाँ समान से मौसम रहने के कारण उनका शरीर उतना वातावरणीय आपदाओं का सामना करने के मौके नही मिलते है । दूसरी बात वहां के स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छे होने के कारण लोग छोटी सी बीमारियों में भी दवा का सेवन करते है।  वो जल्द तो ठीक हो जाते है  पर इसके कारण उनका immune power उतना develop नही हो पाता जितना कि बिना दवाई लिए लोगों के रोग अपने आप ठीक होने वाले लोगों का होता है।
एक उदाहरण से समझिये एक viral बीमारी small pox के बारे में तो सुना ही होगा ।यह अक्सर बच्चों को हुआ करता है । यदि यह भारत मे किसी  गाँव देहात के बच्चों को हो जाता है तो गांव के लोग इसे माता जी के नाम दे देते है अर्थात उनके अनुसार देवी देवताओं के वजह से हुआ है और वे medical treatment लेने के स्थान पर झार- फुक करवाते है। और कुछ दिनों के बात जब मरीज ठीक हो जाता है तो उन्हें और अधिक विश्वास  हो जाता है कि झार फुक के वजह से ही ठीक हुआ है। पर सच मे तो यह बिल्कुल सफेद झूठ है क्यों- कि आपने बाहरी डॉक्टर से इलाज भले न कराया हो पर हमारे शरीर के अन्दर बैठे smart doctor वो अपना काम  24x7 hrs कर रहे होते है और हम ठीक इनके वजह से हुए है ना कि झार फुक के वजह से । और जब द्वारा small pox के virus इस मरीज पर कभी अटैक करेगा तो इसे प्रभावित होने के chance न मात्र है क्योंकि इसका immune power इस virus से लड़ने के लिए develop हो चुका है ।
       मान लीजिए कि यह small pox बीमारी किसी अमेरिकन के बच्चे को हो गया हो तो वह तुरंत मेडिकल treatment करवाएगा  और इसके बच्चे को जल्द ठीक हो जाने के chances बढ़ जाएगा पर इसका immunity power इतना develop नही हो पायेगा जितना कि बिना इलाज किये बच्चे का होगा इसलिए अमेरिकन बच्चे को द्वारा कभी भी small pox के virus attack करता है तो इसे इस बीमारी के होने के chances  बिना इलाज किये ठीक हुए बच्चे से अधिक होगा ।


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