कोरोना के फैलाव में तापमान की भूमिका क्या भूमिकाएं हैं ?




दुनिया इस बात को मानकर चल रही है कि किसी भूक्षेत्र के तापमान बढ़ने से कोरोना के मरने के chances बढ़ जाती है और इस तरह से कोरोना के फैलाव पर break लग जायेगा। यह भी देखा गया है कि जिन देशों के वायुमंडलीय तापमान कम है वहाँ फैलाव ज्यादा हुआ है जैसे यूरोपियन राष्ट्र ठंडे मौसम से गुजर रहे है  तो वहाँ कोरोना की फैलाव तेजी से हुऐ है।जबकि हमारा देश india गर्मी की ओर बढ़ रहा है इसलिए कोरोना का फैलाव उतना नही हुआ है जितना ठंडे प्रान्तों वाले देशों में हुआ है।महजुदा आँकड़े से भी इसकी पुष्टि होती है।
         पर संदेह यहाँ पैदा होता है कि हमारा देश india का औसतन तापमान 30!? degree celcius या इससे अधिक है और मानव के शरीर के तापमान 37 डिग्री यानी अंतर 7 डिग्री का । अर्थात यदि तपमान बढ़ने से कोरोना मर रहा है तो हमारे शरीर के अंदर कोरोना को मरणा चाहिए था। तपमान को एक एंटीडोट का रोल अदा करके और हमारे immune system के साथ मिलकर एक मजबूती से कोरोना को मार भगाना चाहिए था।

 बढ़ती तपमान कोरोना को मारती है यह बात तब और अधिक संदेहात्मक हो जाती है जब हम ठंडे प्रान्तों वाले देश के आँकड़े पर नजर डालेंगे। वैसे यूरोपियन देश जो कोरोना के त्रासदी झेल रहे है उसका वायुमण्डलीय तपमान औसतन 15 डिग्री celcius या उससे ऊपर है मानव का तपमान 37 डिग्री यानी अंतर 20 डिग्री से भी ज्यादा तो भारत के उपेक्षा यहाँ तो कोरोना के मरने के chances और अधिक बढ़ जाते हैं। चूँकि। जैसे ही कोरोना बाहरी ठंडी वातावरण से मानव के शरीर के अंदर प्रवेश करेगा वैसे इसे काफी अधिक बढ़ा हुआ temperature वाली वातावरण मिलेगा जिसके कारण उसका मरने के chances और बढ़ जाएंगे ।
 ( NOTE ----- हाँ तापमान से इसे हानि पहुँच सकती है पर इसके लिए काफी high तापमान चाहिए न कि 30 - 40 डिग्री celcius क्योंकि वायरस जैसे सूक्ष्मजीव बदलती तापमान में अपने को जल्दी अनुकूल बना लेते है। इसलिए तो बड़े जीवों की उपेक्षा छोटे जीवों की संख्या पृथ्वी पर अधिक है।)
     यानी यदि तपमान से कोरोना मरता तो ठंडे प्रान्तों में कोरोना के मरीज कम होने चाहिए थे । पर ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना के cases अधिक है गर्म प्राँतों के उपेक्षा ।
    यदि तापमान उसे मार तो नही रहा पर कहि फैलाव को बढ़ाने में मदद तो नहीं कर रहा है? जी हाँ कोरोना के फैलाव में temperature एक फैक्टर है।     
          मौजूदा आँकड़े गवाह है कि ठंडे मौसम वाले देशों में कोरोना तेजी से फैल रहा है जबकि गर्म मौसम वाले देशों में धीमा से कोरोना अपना पैर पसार रहा है।
Cold land--- जब कोई कोरोना संक्रमित व्यक्ति खाँसता या बोलता है तो उसके शरीर से गर्म हवा बाहर आते है इसके  साथ water vapour भी बाहर आते है। चूँकि कोरोना से संक्रमित है और हमारे अंदर कोरोना के कण है तो वे कोरोना कण water vapour के spherical सतह से चिपककर बाहर आ जाते हैं। उस वाष्प में हजारों कोरोना कण चिपके हो सकते हैं। ठंडे वातावरण होने के कारण औसतन तापमान 10 या 15डिग्री के आसपास होता है और हमारा शरीर का temperature 37 डिग्री यानी तपमान का अंतर काफी अधिक हो जाता है। जिसके कारण हमारे शरीर के बाहर आ रहा water vapour condense होकर एक दूसरे से जुड़ जाते है  और बड़े हो जाते है।अब आप सोच सकते है कि जो water vapour के कण हमे दिखाई भी नही दे रहा था उसमें हजारों कण हो सकते है तो condense होने के बाद बने बड़े water molecule में तो लाखों कोरोना के कण हो सकते है। वे कण ठंडे वातावरण के कारण ऊपर नही उठ पाते है और धीरे धीरे जमीन पर गिर जाते है या यदि इस दौरान हम किसी व्यक्ति से बात कर रहे होते है तो हो सकता है ये कण उसके हाथों पर चिपक जाए या उसके श्वास नली या मुख से उसके अंदर प्रवेश कर गया हो।
NOTE------ ऐसी भौतिकी क्रिया हमे भारत मे ठंडे के मौसम में देखनो की मिलती है ।देखने से ऐसा प्रतीत होता है कि मानो मुँह या नाक से सिगरेट की धुआँ निकल रहा हो।
Hot land----   अभी हमारा भारत देश गर्मी की ओर बढ़ रहा है  और यहाँ के औसतन तापमान 30 डिग्री से अधिक ही है। जब हम बोलते हैं तो हमारे शरीर से भी गर्म हवा और water vapour के कण बाहर आते हैं पर हमारा वातावरण गर्म होने के कारण condense नही हो पाता है और वाष्प के कण बड़े नही हो पाते है। वे वाष्प कण बाहर के तपमान gain करने के बाद और छोटे छोटे टुकड़ों में टूट जाते हैं और ऊपर उठ जाते हैं। इस प्रक्रिया के दौरान  हम किसी व्यक्ति से बात कर रहे होते है तो उसे कोरोना से संक्रमित होने के chances ठंडे प्राँतों के लोगो  के उपेक्षा कम हो जाती है  और होते है तो चूँकि कोरोना के कण उनके अंदर ठंडे प्राँतों के उपेक्षा काफी कम गयी हैं इसलिए recover होने के chances ठंडे प्राँतों वाले संक्रमित व्यक्ति से अधिक होते हैं।
मौजूदा आँकड़े भी इस research को प्रमाणित करता है ।

Comments

Popular posts from this blog

where , what and how is god

Environmental pollution is a serious international problem

सिर्फ खाँसी से नही बोलने से भी फैलता है कोरोना