बांग्लादेश भी चीन का का पक्ष लेते हुए भारत के खिलाफ मोर्चा खोला

बांग्लादेश चीन की पक्षदारी क्यों कर रहा है और ऐसे समय मे जब पड़ोसी देश चीन भारत के साथ युद्ध करने के लिए तुला है तब बंगलादेश को ऐसे विकट परिस्थिति में भारत के साथ देना चाहिए क्योंकि भारत ने भी 1971 के युद्ध मे बांग्लादेश के साथ दिया था। पर आज बांग्लादेश देश चीन के लालच के जाल में फँसकर भारत के खिलाफ हो गया है।  इसको जानने से पहले हम जान लेते हैं बांग्लादेश के भूगौलिक संरचना के बारे में । ताकि इस सवाल का जवाब को समझने में थोड़ा सहूलियत मिले।


बांग्लादेश भारत का पड़ोसी मुल्क है । बांग्लादेश वह मुल्क है जिसका सीमा भारत के साथ सबसे अधिक लगता है और भारत का बंगलादेश से सबसे अधिक । लगभग 4000 km। भारत ही वह मुल्क है जिसने बांग्लादेश को अस्तित्व में 1971 में लाया। इससे पहले यह बंगलादेश पाकिस्तान का हिस्सा था और इसे पूर्वी पाकिस्तान के नाम से जाना जाता था। वह पश्चिमी पाकिस्तान से आजाद होने के लिए पुर जोर कोशिश में लगा था। पर सफलता हाथ न लग रही थी । अन्ततः भारत ने पश्चिमी पाकिस्तान से 1971 में भारत के प्रथम महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के देखरेख में युद्ध लड़के इसे आजाद करवाया।
पर आज बंगलादेश बीती दिनों का एहसान को भूलकर कुछ चीन के द्वारा दी जा रही लालच में फस गया है। और ऐसे नाजुक समय मे चीन की तरफदारी कर रहा है। आख़िर वह कौन सा दाना चीन ने फेका की उसे बांग्लादेश जैसा पक्षी ने चुभ लिया और चीन के जाल में फस गया ।
यह माजरा कुछ अंतरराष्ट्रीय कारोबार चीन बांग्लादेश व्यपार को लेकर है। जब कोरोना के पहले भारत का GDP 4 % के आसपास आ गया था तब बांग्लादेश के GDP 8% के आसपास था। और अभी कोरोना के समय मे बांग्लादेश के ग्रोथ रेट 7% के ऊपर है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री शेख हसीना इसमें और बढ़ोतरी चाहती है इसके लिए एड़ी चोटी का जोर लगाकर हर मुमकिन कोशिश करने की बात कह रही है ताकि इनकी GDP ऐसे दौर में भी 8% के ऊपर रहे। अभी मौजूदा समय मे जब भारत और चीन की दोस्ती में खाई बढ़ती जा रही है तब चीन ने बांग्लादेश के नस पकड़कर उसको अपने तरफ करने के लिए बांग्लादेश के अर्थव्यवस्था को और मजबूती देन के लिए अपना पासा फेका ।
चीन ने बांग्लादेश से जो सामान इम्पोर्ट करती है और चीनी बाजार में बेचा जाता है । उसपर अब चीन सरकार सीमा सुल्क नही वसूलेगा। यानी बांग्लादेश को अपने देश की सामान को चीनी बाजार में बेचने के लिए चीन सरकार को टैक्स नही देना पड़ेगा। इससे यह फायदा होगा कि अब बांग्लादेश के सामान चीन में और सस्ता मिलेगा जिसके कारण लोग और अधिक मात्रा में खरीदेंगे जिससे बांग्लादेश को आर्थिक रूप से बड़ा फायदा होगा। ….. दूसरी तरफ जो चीनी सामान बंगलादेश के बाजारों में बिकता है उसपे बांग्लादेश सरकार सीमा सुल्क वसूलते रहेगी इसमे कोई कटौती नही होगी।

अब आप समझ सकते है कि बांग्लादेश के दोनों हाथों में चीन ने खोवा वाला लडडू दे दिया है तो भला बांग्लादेश यह मौका का फायदा क्यों न उठाय। इसलिए जो बांग्लादेश भारत के एहसान का हमेशा दुहाई दिया करता है। ।….. वही बांग्लादेश आज छलावा क्यों कर रहा है । जबकि उसका सीमा भारत के साथ लगता है ना कि चीन के साथ । इसकी वजह से भारत के साथ व्यापार करने में उसे परेशानी नही होती । और दोनों देश की दोस्ती भी पाकिस्तान से बेहतर है ….. फिर भी धोखा!!! आप तो अब समझ गए होंगे। दोबारा बताने की जरुरत नही है।
काश हम भी चीन के जैसा मजबूत होते । हमारी अर्थव्यवस्था 2.5 ट्रिलियन डॉलर का है तो चीन का 14 ट्रिलियन डॉलर का । आप सोच सकते हैं की चीन कितना अधिक हमसे अमीर है। यदि हम चीन के जैसा आर्थिक रूप से मजबूत होते तो आज बांग्लादेश चीन की नही बल्कि हमारी तरफदारी कर रहा होता ।


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